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शहर में भू-माफिया की दूसरी कहानी: न्यायालय के आदेश के बावजूद पीड़ितों को नहीं मिल रहा कब्जा

शहर में भू-माफिया की दूसरी कहानी: न्यायालय के आदेश के बावजूद पीड़ितों को नहीं मिल रहा कब्जा

कोरिया। शहर में भू-माफिया का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। माननीय न्यायालयों के स्पष्ट आदेश, राजस्व विभाग की कार्यवाही और बार-बार सीमांकन के बावजूद पीड़ित पक्षों को आज तक उनकी भूमि पर कब्जा नहीं दिलाया जा सका है। ऐसा ही एक गंभीर मामला जिला न्यायालय के सामने स्थित खरवत क्षेत्र का सामने आया है, जहाँ दुलारसाय राजवाडे की भूमि खसरा नंबर 1299 पर भू-माफिया द्वारा अवैध कब्जा कर लिया गया है।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, उक्त भूमि को लेकर दुलारसाय राजवाडे द्वारा सिविल न्यायालय में वाद प्रस्तुत किया गया था, जिसमें माननीय सिविल न्यायालय ने स्पष्ट रूप से आदेश दुलारसाय के पक्ष में पारित किया। इसके बावजूद राजस्व विभाग आज तक दुलारसाय अथवा उनके सहायक को वास्तविक कब्जा नहीं दिला सका है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि कई बार राजस्व अमले और राजा शूटिंग के माध्यम से सीमांकन कराया गया, लेकिन हर बार सीमांकन प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। दुलारसाय राजवाडे का आरोप है कि राजा शूटिंग और भू-माफिया के बीच मिलीभगत के चलते सीमांकन सही ढंग से नहीं किया गया, जिससे अवैध कब्जाधारियों को लाभ मिलता रहा और न्यायालय के आदेश कागजों तक ही सीमित रह गए। पीड़ित पक्ष लगातार प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काट रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो सकी है। इसी तरह का एक और मामला रामपुर क्षेत्र से सामने आया है। यहाँ यादव समाज की भूमि पर भू-माफिया द्वारा अवैध कब्जा किया गया है। आरोप है कि यह कब्जा किसी आम व्यक्ति ने नहीं, बल्कि शहर के एकलौते उपाध्यक्ष के भाई द्वारा किया गया है। इस मामले में भी माननीय न्यायालय और राजस्व न्यायालय द्वारा स्पष्ट आदेश पारित किए जा चुके हैं, लेकिन उनके आदेशों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब न्यायालय और राजस्व विभाग के आदेशों का भी पालन नहीं हो रहा है, तो आम नागरिक किससे न्याय की उम्मीद करे। भू-माफिया इतने बेखौफ हो चुके हैं कि प्रशासनिक आदेशों को भी ठेंगा दिखा रहे हैं। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या जिला प्रशासन और राजस्व विभाग न्यायालय के आदेशों को प्रभावी ढंग से लागू कर पाएंगे, या फिर भू-माफिया का यह खेल यूँ ही चलता रहेगा। पीड़ित परिवारों को अब भी न्याय का इंतजार है और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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